यादों के खुशनुमा फूल

यादों के खुशनुमा फूल

खुले हुए कूड़ेदान से उठती हुई बदबू………
जैसे किसी ने पीली हुई किताब के पन्ने पलट दिए हों……
गुजरा वक़्त लिहाफ़ नही……….
धूप दिखा के फिर ओढ़ लिया जाए…….
ये तो वो सूखे हुए बीज हैं…….
जिन्हे दफ़्न कर दो ……..
तभी यादों के खुशनुमा फूल खिलते हैं…..

Hindi Poetry by Nikhil Kapoor
Blog: Lamhe Zindagi Ke

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This Post Has 2 Comments

  1. Meeta

    Kya baat

  2. Meeta

    Behad khoobsurat

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