" कितनों के साथ तुमने मुझे सोते देखा है । "

” कितनों के साथ तुमने मुझे सोते देखा है । “

” क्या लगता है तू मेरा ,बाप है , भाई है , खसम है या मेरा दलाल है । किस रिश्ते से तू मेरा character certificate issue करता फिर रहा है । मेरे बाप भाई को भी नहीं पता होगा मैं कितनों के साथ सोई हूं , फिर तुझे कैसे पता , साले, दलाल है क्या तू मेरा , मेरी चादर से रेजगरियां बटोरता फिरता है तू , बता सबको कमीन तुझे कैसे पता । और तू जो कहता फिरता है की मेरा इस ऑफिस में कईयों के साथ चक्कर था , तो भड़वे तेरा क्यूं नहीं था , तेरी टांगों के बीच में मांस का वो लोथड़ा नहीं है जो तुम सबको मर्द बनाता है । ” ऑफिस के सारे स्टाफ को जैसे सांप सूंघ गया था । read more in blog

" मेरे इस शहर में ,hindi poetry

” मेरे इस शहर में ‘

” मेरे इस शहर में ,बातों का कोई जिस्म नहीं होता ,और वादे बगैर उम्र के जीते रहते हैं ।मेरे इस शहर में ,आदतन गले लगे दुश्मन की भी ,पीठ …

कुछ दिनों पहले, hindi poetry

कुछ दिनों पहले

कुछ दिनों पहले ,बातों की कुछ लफ़्ज़ों से तकरार हो गई ,कुछ दरवाजे जोर से भेडे गए ,कुछ बर्तनों के लुढकने की आवाज़ हुई ,कुछ शामों और रातों के बीच लकीर …

वो जो थी मेरी दोस्ती ।

वो जो थी मेरी दोस्ती

” बहुत याद आती है ,दिल के घड़े में जब जब झांकता हूं मैं ,बूंद बूंद कर रिस गई वो जो थीमेरी दोस्ती ।बहुत याद आती है ,दिल के घड़े में …

Hindi poetry titled अजीब सा खालीपन हैं

अजीब सा खालीपन हैं

अभी अभी पढ़ के एक दिन फाड़ा हैबचे हुए टोस्ट के टुकड़े खाली प्लेट में अब भी पड़े हैअजीब सा खालीपन हैंयादों की गुल्लक इतनी भर गयी है शायद कितना भी …

उम्र के निशान ,red rose on the streets. Lamhe Zindagi Ke, Hindi Poetry on Life

उम्र के निशान

Poem: उम्र के निशान ” इंद्रधनुषी रंगों से भरे , बुलबुले से सपने , रात की नाभि पर ,नींद भर लट्टूओं सा नाचते रहे ।सुबह की उंगली क्या लगी ,फूट कर अंधेरों …

"मौत""जिंदगी" cremation of dead body

“मौत”-” जिंदगी”

आदतन “मौत” एक कहानी लिखने बैठी,बिखरने लगे जब पन्ने सारे,हसरत की जिल्द में बाँध उनको,“बेखयाली” में नाम की जगह ” जिंदगी” लिख बैठी | Hindi Poetry by Nikhil KapoorBlog: Lamhe …