" कितनों के साथ तुमने मुझे सोते देखा है । "

” कितनों के साथ तुमने मुझे सोते देखा है । “

” क्या लगता है तू मेरा ,बाप है , भाई है , खसम है या मेरा दलाल है । किस रिश्ते से तू मेरा character certificate issue करता फिर रहा है । मेरे बाप भाई को भी नहीं पता होगा मैं कितनों के साथ सोई हूं , फिर तुझे कैसे पता , साले, दलाल है क्या तू मेरा , मेरी चादर से रेजगरियां बटोरता फिरता है तू , बता सबको कमीन तुझे कैसे पता । और तू जो कहता फिरता है की मेरा इस ऑफिस में कईयों के साथ चक्कर था , तो भड़वे तेरा क्यूं नहीं था , तेरी टांगों के बीच में मांस का वो लोथड़ा नहीं है जो तुम सबको मर्द बनाता है । ” ऑफिस के सारे स्टाफ को जैसे सांप सूंघ गया था । read more in blog

ek sach aur intezar

“प्यार का ट्रेजर हंट । या प्यार की भूल भुलैया । “

कई बार लगता है सबके पास प्यार को लेकर कोई ना कोई सवाल है । जवाब कोई नहीं , या शायद जवाब खोजने की कोशिश ही नहीं की । बस मान लिया खत्म हो गया । जैसे प्यार ना हुए शक्कर का डिब्बा हो गया , जिस स्पीड से इस्तेमाल किया उस स्पीड से खत्म । lets talk

कुछ दिनों पहले, hindi poetry

कुछ दिनों पहले

कुछ दिनों पहले ,बातों की कुछ लफ़्ज़ों से तकरार हो गई ,कुछ दरवाजे जोर से भेडे गए ,कुछ बर्तनों के लुढकने की आवाज़ हुई ,कुछ शामों और रातों के बीच लकीर …

क्या तुम्हे मैं , अब भी याद आती हूं ।

क्या तुम्हे मैं , अब भी याद आती हूं ।

” क्या तुम्हे मैं ,अब भी याद आती हूं ।या फिर उन कागजों को तुमनेएक खाली फाइल में पंच कर किसी ड्रॉअर में रख दिया है ।तुम्हे शायद याद होगा …

यादों के खुशनुमा फूल , flowers on grave

यादों के खुशनुमा फूल

खुले हुए कूड़ेदान से उठती हुई बदबू……… जैसे किसी ने पीली हुई किताब के पन्ने पलट दिए हों…… गुजरा वक़्त लिहाफ़ नही………. धूप दिखा के फिर ओढ़ लिया जाए……. ये …