साँसे भी कुछ यूँ ही ठहर जाएँगी

साँसे भी कुछ यूँ ही ठहर जाएँगी

“ साँसे भी कुछ यूँ ही ठहर जाएँगी ,
एक दिन ,
रिश्तों में कोई बात ठहर गयी हो जैसे ।”
 
Hindi Poetry by Nikhil Kapoor
Blog: Lamhe Zindagi Ke

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