एक सच और इंतज़ार
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एक सच और इंतज़ार

" मैं हूं तेरा सच , इसके आगे तू बता क्या सच जानना है तुझे , इसका मतलब तुझे अपने इस सच पर भरोसा नहीं , तुझे भी सिर्फ एक नाम चाहिए सच की जगह । और बेटा मुझे अपने सच को किसी कटघरे में खड़ा कर के उसे साबित करने के लिए गवाही नहीं देनी कोई जिरह बहस नहीं करनी । बाकी तेरी मर्ज़ी । तुझे जन्म देना मेरी सच्चाई थी मेरी मर्ज़ी , बाकी तू जो भी समझना चाहता है समझ सकता है ।" उसने अम्मा की तस्वीर को सीधा करते हुए कहा । तस्वीर में भी अम्मा की आंखों में सिर्फ ममता थी कोई सवाल नहीं ।read more in lamhe zindagi ke

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“प्यार का ट्रेजर हंट । या प्यार की भूल भुलैया । “
"प्यार का ट्रेजर हंट । या प्यार की भूल भुलैया । "

“प्यार का ट्रेजर हंट । या प्यार की भूल भुलैया । “

कई बार लगता है सबके पास प्यार को लेकर कोई ना कोई सवाल है । जवाब कोई नहीं , या शायद जवाब खोजने की कोशिश ही नहीं की । बस मान लिया खत्म हो गया । जैसे प्यार ना हुए शक्कर का डिब्बा हो गया , जिस स्पीड से इस्तेमाल किया उस स्पीड से खत्म । lets talk

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