ख़ाली कनस्तर सा चाँद - moon
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ख़ाली कनस्तर सा चाँद

ख़ाली कनस्तर सा चाँद ,रात भर ज़हन की दरारों में भटकता रहा रिसती हुई चाँदनी सुना है  रात भर एक उधड़ा हुआ खेस बिनती रही । Hindi Poetry by Nikhil Kapoor …

साँसे भी कुछ यूँ ही ठहर जाएँगी - Vintage Clock
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साँसे भी कुछ यूँ ही ठहर जाएँगी

“ साँसे भी कुछ यूँ ही ठहर जाएँगी , एक दिन , रिश्तों में कोई बात ठहर गयी हो जैसे ।”   Hindi Poetry by Nikhil Kapoor Blog: Lamhe Zindagi …