My Books

Mayane

Mayane? / मायने?

हर रिश्ते, हर बात, हर खुशी हर दर्द के “मायने” खोजते खोजते जिंदगी कब हांथों से फिसल जाती है, पता ही नहीं चलता। क्यूं? कैसे? कि सलिए? जिंदगी हर पल सिर्फ इन्हीं प्रश्नों का कौर तोड़ती रहती है और गुजरती रहती है। क्या जरूरी है हर रिश्ते का कोई कारण होना, कोई नाम होना, कोई बेंच मार्क होना। क्यूं आखिर ये? प्रश्न वाचक चिन्ह क्यूं। हर रिश्ते के होने, ना होने की वजह क्यूं?

Aaj Kuch Sadkon Ne Karvatein Li Hai

Aaj Kuchh Sadakon Ne Karwatein Li Hain / आज कुछ सड़कों ने करवटें ली हैं

‘अदृश्य’ की चाहत में भागती ज़िंदगी के हाथों से जाने कितने रिश्तों की डोर छूटी, जाने कितने रिश्तों ने गाँठ खोलकर तेज़ क़दम बढ़ा लिए, कुछ फंदे उलझकर गाँठ बन गए, कुछ समय की सलाई से छूट गए। कहते हैं चटके हुए घड़े के चारों तरफ़ रस्सी लपेट दो तो हल्का-हल्का पानी रिस-रिसकर उसकी ठंडक बनाए रखता है। बस कुछ इसी तरह वक़्त के कुछ टुकड़ों को याद की कच्ची रस्सी से लपेट दिया और रिसने के दर्द की स्याही काग़ज़ों पर बिखरती रही, शब्द बनती रही और ज़िंदगी चलती रही। इन पन्नों में जो भी कुछ हैं उन्हें कविता तो नहीं कहा जा सकता, बस कुछ पल हैं जो सुस्ताने को ठहर गए हैं।

About Me

लेखक पेशे से एक फैशन डिजाइनर हैं, और वर्तमान में PRATPSONS जयपुर में काम कर रहे हैं। रिश्तों, उनके अस्तित्व और उनकी मर्या दाओं पर उठाए जाने वाले सवाल उनके मन में एक अजीब सी घुटन भर देते हैं।

कि सी भी रिश्ते के बेनाम होने पर उठने वाले सवाल, उनको मर्या दाओं में बांध कर उन्हें सुरक्षित कर लेना।

कहां लिखा है, कि आप के वल एक बार प्यार कर सकते हैं, आप एक ही समय में एक से अधिक लोग