लिफ़ाफ़े चन्द काग़ज़ के

लिफ़ाफ़े चन्द काग़ज़ के

चन्द लिफ़ाफ़े काग़ज़ के ,
कुछ तेल के दाग़ ,
बचे हुए कुछ को टटोलती उँगलियाँ ,
अजीब है ये दिल ,
हर बार नए जज़्बात के साथ बिकता है |

फिर
बारिश के पानी की नाव बन ,
बह निकलता है ।

Hindi Poetry by Nikhil Kapoor
Blog: Lamhe Zindagi Ke

Social Media Links
Facebook
Instagram
Youtube Channel

This Post Has 4 Comments

Leave a Reply