जाने क्यूँ  तेरी आँखें हमें - eyes potrait

जाने क्यूँ  तेरी आँखें हमें

“ जाने क्यूँ  तेरी आँखें हमें, आइने सी नज़र आती हैं , देखता है जब जब तू नफ़रत से हमें प्यार की एक लकीर नज़र आती है , कुछ ख़त हैं …

कल रात ज़िंदगी जब - park bench

कल रात ज़िंदगी जब

कल रात ज़िंदगी जब मेरे पहलू में बैठी थी , कुछ नाराज़गी से पूछा मैंने उससे क्यूँ आख़िर क्यूँ मुझे इतना सताती है , कहने को तू मेरी अपनी है …

चलो चिनाब ओढ़ आते हैं - Silhouette of a girl

चलो चिनाब ओढ़ आते हैं

चलो चिनाब ओढ़ आते हैंपके दिनों से कुछबातें तोड़ लाते हैं ।चलो चिनाब ओढ़ आते हैंसुखा कर यादों की मुँडेर पर किताबों में कुछ रिश्ते छिपाते हैं ।चलो चिनाब ओढ़ आते …

वो शख़्स - newspaper and glasses

वो शख़्स 

करता है अक्सर वो बातें काग़ज़ के रूमालों से कुछ धब्बे हैं , कुछ निशाँ बूँदों के जो अक्सर एक शक्ल ले लेते हैं ।सुना है वो शख़्स हर रोज़ एक कहानी लिखता है …