अलगनी पर सूखे कपड़ों में

अलगनी पर सूखे कपड़ों में

अलगनी पर सूखे कपड़ों में ,
कुछ दाग़ नज़र आते हैं ,
दिन भर जो ये जलता है सूरज ,
उसके आँसूँ शायद यहाँ थम जाते हैं ।
 
Hindi Poetry by Nikhil Kapoor
Blog: Lamhe Zindagi Ke

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