Long Poems

“चलो , कुछ खत फाड़ देते हैं “

“चलो ,

कुछ खत फाड़ देते हैं ,

सहेजे थे जो कुछ उम्मीदों के लम्हे ,

उन्हें बुहार देते हैं ।

चलो , 

कुछ खत फाड़ देते हैं ,

कुछ पल जो ठहर के यहां ,

यादों की लकीरों से लिपटे सोते हैं ,

उनके घरोंदओंं को चलो फिर उजाड़ देते हैं ।

चलो ,

कुछ खत फाड़ देते हैं ।

ना तेरा था ना मेरा था ,

वो एक अजनबी सा लम्हा था ,

रिश्तों के पिंजरे से चलो इसे अब निजात देते हैं ।

चलो

 कुछ खत फाड़ देते हैं ।

सहेजे थे किताबों में जो कुछ अल्फ़ाज़ बोले बिन ,

गंगा की लहरों में उसे एक आवाज़ देते हैं ।

चलो 

कुछ खत फाड़ देते हैं ।

कुछ ये जिस्म झूठा था ,

गलती कुछ दिल से भी हुई ,

बहुत ठहरे अदालतों में ,

अब खुद ही अपनी दस्तकें हम बांट लेते हैं ,

चलो कुछ खत फाड़ देते हैं ।

रुको जो तुम अब कहीं आइने से मेरा पता ना पूछना ,

यहां आइने आंखों में छिपे एक बाल को भी भांप लेते हैं ।

चलो कुछ खत फाड़ देते हैं ।

” निखिल ” 

Hindi Poetry by Nikhil Kapoor
Blog: Lamhe Zindagi Ke

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