कुछ दिनों पहले, hindi poetry
Long Poems

कुछ दिनों पहले

कुछ दिनों पहले ,
बातों की कुछ लफ़्ज़ों से तकरार हो गई ,
कुछ दरवाजे जोर से भेडे गए ,
कुछ बर्तनों के लुढकने की आवाज़ हुई ,
कुछ शामों और रातों के बीच लकीर खींची गई ,
और कुछ  रिश्ते कागज़ की तरह मरोड़ कर डस्टबिन की नजर हुए ,
आज उदास सी बातें मुंडेर पर बैठी सोच रही हैं ,
जरूरी तो नहीं हर अल्फ़ाज़ का मतलब वहीं हो ,
जो बातों में कहा जाए ।
“डस्टबिन से शायद कुछ सड़े हुए फूलों की बास आने लगी है ।”

Hindi Poetry by Nikhil Kapoor
Blog: Lamhe Zindagi Ke

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