दौड़ती भागती इन सड़कों की
Long Poems

दौड़ती भागती इन सड़कों की

” दौड़ती भागती इन सड़कों की ,
कोई मंजिलें होती नहीं ।
भागती रहती हैं ये अक्सर
 एक मकान कि तलाश में ।
कुछ सांसे हैं जो इनसे उतरकर ,
किसी मकान के किवाड़ पर गुजर जाती हैं ।
दूर कहीं चांद सड़क पर खड़ा दिखता तो है मगर ,
ये सड़कें  उसके भी कहीं आगे निकल जाती हैं ।
इन सड़कों पर कहीं किसी पांव के निशान नहीं हैं मगर ,
इनको हर रेहगुजर के साथ भागते रहने की आदत है ।
गालियां , पगडंडियां भटक कर बिखर जाती है
 बिना किसी पहचान के इधर उधर ,
और अपनी पहचान लिए ,
भागती रहती हैं ये सड़कें उम्र भर ।

Hindi Poetry by Nikhil Kapoor
Blog: Lamhe Zindagi Ke

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