किस्सा, hindi poetry
Long Poems

किस्सा

कोरे पन्ने पर शुरू हुई ,
 शब्दों में  उलझ कहानी हो गई जिंदगी ।
खोजते खोजते खुद को ,
एक बात के अनेक अर्थों की डिक्शनरी हो गई जिंदगी ।
कोई सवाल तो थी ही नहीं ,
जाने क्यूं लोग बूझते रहे एक पहेली के नाम से यूं ही बदनाम हो गई जिंदगी ।
कोई मिला ही कब था रूबरू इससे यूं ही इसके इश्क़ में कहते है कि एक दौड़ हो गई जिंदगी । 
कहां से आयी , कहां चुक गई ,
बस एक पड़ाव थी ,
यूं ही एक किस्सा बन गई जिंदगी ।

Hindi Poetry by Nikhil Kapoor
Blog: Lamhe Zindagi Ke

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