मैं, bedding
Short Poems

मैं

” मैं जिस्म नहीं हूं ,
मैं जां भी नहीं हूं ,
मैं दिल भी नहीं ,
मैं खुदा भी नहीं हूं ,
मैं लम्हा हूं बस एक जो जिया था तुमने ,
तुम्हारे जिस्म से बहे पसीने की सांसों में मैं हूं ,
वो चादर की सिलवटों में लिपट के जो सोया ,
वक़्त की दो सुइयों की एक लम्हे की चाहत ही मैं हूं ।”


Hindi Poetry by Nikhil Kapoor
Blog: Lamhe Zindagi Ke


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