अक्स - An Abstract Painting
Long Poems

अक्सर

“अक्सर ,
कुछ बातें अधूरी रह जाती ,
दौड़ते हुए दिन के एक पल के इंतजार में ,
बीत जाती है रात ,
थके हुए सपनों के पांव को सहलाने में , 
अक्सर ,
कुछ रिश्ते बैठे रह जाते हैं अधूरे ,
अपने घर की चौखट के बाहर ,
एक नेमप्लेट के इंतजार में ,
अक्सर होता है ऐसा ,

अक्सर , 
सूखी हुई कुछ कलियां ,
पीली हुई कुछ पत्तियां ,
देख कर हम गमले की पौध बदल देते है ,
अक्सर ,
किसी कोने में पड़ी कुछ नम जड़ें ,
करहाती रहती हैं ,
जरा सा रुकते तो ये कोख अभी बांझ नहीं हुई थी ।
बदल जाते हैं कुछ रिश्ते पनपने से पहले ,
अक्सर ऐसा होता है ,

अक्सर ,
कुछ सपनों को देखने की उम्मीद में ,
हम अपने सिरहाने ऊंचे करते जाते है ,
अक्सर ,
कुछ सपने सिरहनों के बोझ से दब ,
जाने कब मर जाते है ।
कुछ सपने पनपते ही हैं ,
दूसरे सपनों की कब्र पर ,
अक्सर ऐसा होता है ।

अक्सर ,
लिपटी हुई कई बेलें ,
सूख कर मर जाती हैं ,
अक्सर ,
हम उन्हें वार्निश कर ,
वुड आर्ट के नाम से ,
सजा देते है अपने ड्राइंग रूम में ।
सूखे हुए कुछ रिश्ते जीते रहते है एक मकान में ,
एकसाथ ,
एक घर की उम्मीद में ,
अक्सर ऐसा होता है ।

Hindi Poetry by Nikhil Kapoor
Blog:- Lamhe Zindagi Ke

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