Long Poems

तो तुझसे बात करूँ

इतिहास अपनी काख दबा लूँ ,
तो तुझसे बात करूँ |
पत्थर की अपनी कोख छुपा लूँ ,
तो तुझसे बात करूँ |
माना की शरीर तू भी है,
शरीर मैं भी ,
सच को संस्कारों के चीथड़ से निकाल लूँ ,
तो तुझसे बात करूँ|
माना की भूख जरूरी है ये ,
इस भूख की भूख के लिए ,
दिल का एक छौंक डाल दूँ ,
तो तुझसे बात करूँ |

Hindi Poetry by Nikhil Kapoor
Blog: Lamhe Zindagi Ke

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2 Comments

  1. Neetu kanwar says:

    Amazing poetry sir ??

    1. nikhilkapoor65 says:

      thanks beta ji

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