आज का एक पन्ना - fountain pen
आज का एक पन्ना ख़ाली ही छोड़ दिया ,
मैंने
मेरे बाद तुम्हें इसकी आदत डालनी होगी ,
श्याही काम नहीं हुई है मेरी बातों की अभी ,
बस मेरे बाद की ख़ामोशी की
अब तुम्हें आदत डालनी होगी ,
बहुत दिनों से ख़ामोशी का एक पन्ना
तुम ,
लिखते आए हो ,
अब इस ख़ामोशी को पढ़ने की ,
तुम्हें ,
आदत डालनी होगी ।
मेरे बाद कोई जो तुमसे
पूछे मेरा हाल ,
पैरों के नीचे मसल कर हर बार वो
आख़िरी कश ,
तुम्हें
मेरे ना हो के भी होने की अब
आदत डालनी होगी ।
 

Hindi Poetry by Nikhil Kapoor
Blog: Lamhe Zindagi Ke

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