साथ एक वो बीत गया, books sketch
साथ एक वो बीत गया ,
आँखों का सावन रीत गया ।
हाथों में अपने पतझर ले ,
क़लम का रंग भी सूख गया ।
क्या मिलना और बिछड़ना क्या ,
देह मोह अब छूट गया ।
ये सब “ नाम “ हैं , रिश्ते नहीं ,
मन बात अब ये सीख गया ।
हर जीवन एक पड़ाव है ,
सबक़ ये मैं सीख गया ।
मेरा मेरा करते करते ,
ख़ुद को जो मैं भूला था ,
अर्थ मेरे होने का समझा अब मैं ,
जीत हार के चकक्कर में ,
जिसको था मैं भूल गया ।
 
Hindi Poetry by Nikhil Kapoor
Blog: Lamhe Zindagi Ke

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