फ़टी हुई एक चादर ओढ़ , Indian Baba
Short Poems

फ़टी हुई एक चादर ओढ़

फ़टी हुई एक चादर ओढ़ ,
फिरता है मन ये बावरा ,
यहाँ वहाँ बटोरे सिक्के यादों के ,
और बोले ये है मेरा ” कारवाँ ” ।
 
Hindi Poetry by Nikhil Kapoor
Blog: Lamhe Zindagi Ke

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