जाने क्यूँ  तेरी आँखें हमें - eyes potrait
“ जाने क्यूँ  तेरी आँखें हमें,
आइने सी नज़र आती हैं ,
देखता है जब जब तू नफ़रत से हमें
प्यार की एक लकीर नज़र आती है ,
कुछ ख़त हैं ,
जो ना लिखे हमने ,
ना पढ़ पाए तुम ,
फिर क्यूँ इस जिल्द पर तेरी मेरी
कहानी नज़र आती है ,
अपने कपड़ों में बस एक जोड़ा “ कोरा “ रखना ,
अपनों को कहते हैं कोरे कपड़ों में ,
विदाई दी जाती है “
निखिल
Hindi Poetry by Nikhil Kapoor
Blog: Lamhe Zindagi Ke

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