एक मासूम सा बच्चा है - small kid and his father
एक मासूम सा बच्चा है ,
कुछ ख़फ़ा ख़फ़ा सा रहता है ,
ख़ुद को बेहद मज़बूत दिखाता है ,
भीतर से डरा डरा सा रहता है ,
सोचता हूँ लगा को उसको अपने सीने से ,
इतना समझा दूँ ,
“ ज़िंदगी महज़ जलता हुआ धुआँ नहीं ,
इसके एक सहमा हुआ सा दिल भी रहता है “
जाने क्यूँ डरता है वो बच्चा ,
कुछ किताबों को पढ़ने से ,
किसी भी रिश्ते की कहानी से उसे ख़ौफ़ सा लगता है ,
लोग कहते हैं , ख़ुदगर्ज़ है वो ,
मैं जानता हूँ वो बस ख़ुद में डूबा रहता है ,
मन करता है उसे काँधे पे बिठा एक दिन मेला घुमाने ले जाऊँ ,
वो मुस्कुराए , मैं हँसूँ  वो खिलखिलाने लग जाए ,
फिर छोड़ के उसकी ऊँगली मैं ,
दूर एक इंद्रधनुष बन जाऊँ ,
जब भी कभी उदास हो के जो देके मुझे ,
धीरे से मुस्कुराए और फिर खिलखिलाने लग जाए ।
 
Hindi Poetry by Nikhil Kapoor
Blog: Lamhe Zindagi Ke

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