जिंदगी- Chair, abandoned house
जिंदगी 
तेरे लबादे पर
खुशियों के कुछ पैबंद हैं
जेब में 
यादों की कुछ रेजगारी है
छाती पे
सांस के एक टूटा हुआ
बटन हैं
बस इतनी ही औकात है तेरी
जिंदगी
जैसी मिली
जहां मिली
ओढ़ लीजिये
तेरी मेरी का अदल बदल पाना
स्याह रातों में
अँधेरे का भरम है।
ये जो तेरी उँगलियॉ
जेब में रेजगारी पे
बार बार मचलती रहती हैं
देखना सिलाई का कोई धागा
गलती से खिंच न जाए
आज कल
रिश्तों के फिक्स्ड डिपाजिट पर
यादों का ब्याज
बहुत कम हैं
और तेरी छाती
पे लगे साँसों के टूटे बटन
के धागों में
हसरतों का जोर
बहुत कम है ।
Hindi Poetry by Nikhil Kapoor
Blog: Lamhe Zindagi Ke

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