वो शख़्स - newspaper and glasses
करता है अक्सर वो बातें 
काग़ज़ के रूमालों से 
कुछ धब्बे हैं , कुछ निशाँ बूँदों के 
जो अक्सर एक शक्ल ले लेते हैं ।
सुना है वो शख़्स 
हर रोज़ एक कहानी लिखता है ।
गलियारों के क़ोनों से
पुरानी कुछ दराजों से
अक्सर सूखे कुछ रूक्के मिलते हैं
सुना है अक्सर रातों में
वो शख़्स बावला फिरता है ।
सिरहाने पे अपने मुझको
अक्सर पानी की कुछ बूँदे मिलती हैं
कहते है लोग कई
वो शख़्स मेरे जैसा लगता है ।
सिरहाने को अक्सर मैं
ख़ुद से लिपटा लेता हूँ
लगता है जैसे अंदर मेरे 
दिल और कोई धड़कता है ।
 
Hindi Poetry by Nikhil Kapoor
Blog: Lamhe Zindagi Ke

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