ख़ाली कनस्तर सा चाँद - moon
ख़ाली कनस्तर सा चाँद ,
रात भर ज़हन की दरारों में भटकता रहा 
रिसती हुई चाँदनी सुना है 
रात भर एक उधड़ा हुआ खेस बिनती रही ।
Hindi Poetry by Nikhil Kapoor
Blog: Lamhe Zindagi Ke

Social Media Links
Facebook
Instagram
Youtube Channel