चन्द लिफ़ाफ़े काग़ज़ के - newspaper seller
चन्द लिफ़ाफ़े काग़ज़ के ,
कुछ तेल के दाग़ ,
बचे हुए “कुछ” को टटोलती उँगलियाँ ,
अजीब है ये दिल
हर बार नए जज़्बात के साथ बिकता है
फिर
बारिश के पानी की नाव बन
बह निकलता है ।
Hindi Poetry by Nikhil Kapoor
Blog: Lamhe Zindagi Ke
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