” कितनों के साथ तुमने मुझे सोते देखा है । “
" कितनों के साथ तुमने मुझे सोते देखा है । "

” कितनों के साथ तुमने मुझे सोते देखा है । “

” क्या लगता है तू मेरा ,बाप है , भाई है , खसम है या मेरा दलाल है । किस रिश्ते से तू मेरा character certificate issue  करता फिर रहा है । मेरे बाप भाई को भी नहीं पता होगा मैं कितनों के साथ सोई हूं , फिर तुझे कैसे पता , साले, दलाल है क्या तू मेरा , मेरी चादर से रेजगरियां बटोरता फिरता है तू , बता सबको कमीन तुझे कैसे पता । और तू जो कहता फिरता है की मेरा इस ऑफिस में कईयों के साथ चक्कर था , तो भड़वे तेरा क्यूं नहीं था , तेरी टांगों के बीच में मांस का वो लोथड़ा नहीं है जो तुम सबको मर्द बनाता है । ” ऑफिस के सारे स्टाफ  को जैसे सांप सूंघ गया था ।

 बाहर जून , जुलाई की तेज लू चल रही थी , अंदर एसी की चिल्ड हवा में भी राज के माथे से पसीने की बूंदे लकीर बन कर बहना शुरू हो गई थीं , उसने सपने में भी शायद नहीं सोचा था की उसके साथ ऐसा कुछ हो सकता है । आदतन सोनाया को ऑफिस के अंदर आते देख अपने चापलूस अंदाज में राज बोला ” अरे मैडम आप ऑफिस से क्या गईं रौनक ही चली गई । अभी दो दिन पहले ही हम सब आपको याद कर रहे थे । “

 ” अच्छा क्या याद कर रहे थे मेरे बारे में ” सनाया ने राज के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा ।

” कुछ नहीं बस ऐसे ही ।” राज ने कुछ हकलाते हुए कहा ।

” अरे बताओ ना , मुझे भी तो पता चले लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं ।” सनाया ने राज के गले में हाथ डालते हुए कहा ।

” ये , ये आप क्या कर रही हैं । ” राज ने सनाया से दूर होते हुए कहा ।

” क्यूं , क्या कर रही हूं , मैं तो ऐसी ही हूं , तुम ही तो कह रहे थे ना मैं कैरेक्टर लेस हूं , मोटरसाइकिल पर लोगों से चिपक कर बैठती हूं , लोगो पर डोरे डाल कर उनका फायदा उठाती हूं । ” सनाया का चेहरा तमतमा गया था ।

” नहीं , नहीं किसी से भी पूछ लो आप मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा ।” राज को समझ नहीं आ रहा था वो कहां देखे , पूरा स्टाफ चारो तरफ इकट्ठा हो गया था ।

 ” अच्छा तो क्या बोला था , तुम ही बता दो , क्या तारीफ कर रहे थे मेरी । मैं बिस्तर पर बहुत मज़े देती हूं या मोटरसाइकिल पर बैठ के मेरा हाथ अपने आप कमर से नीचे सरक जाता है । इतना काफी है या और ….” सनाया का चेहरा तमतमा रहा था ।

” आप किसी से भी पूछ लो मैं , मैं कुछ भी नहीं के रहा था । मैं भला झूट क्यूं बोलूंगा । “

 ” अरे हां तुम भला झूठ क्यूं बोलोगे , तुम तो बहुत बड़े भक्त हो , मंदिरों में जाते हो , प्रसाद बांटते हो , मंडली में भजन गाते हो , तुम्हारे मुंह से कुछ गलत कैसे …… अरे मैं तो भूल ही गई थी ।”

 ” वहीं तो मैं कह रहा हूं कि आपको कोई गलतफहमी हुई है ” राज ने खुद को संभालते हुए हाथ में पहने कड़े को होंठों से लगाते हुए कहा।

” हां हां , तुम्हे तो हम सब में देवियां दिखाई देती होंगी । तभी तो आए दिन तुम हम सबका कभी समोसे कभी दाल की कचोरी तो कभी मावे मिश्री से भोग लगाते हो ।” स्टाफ की कुछ औरतें इस बात पर दुपट्टे में मुंह छुपा कर खी खी करने लगीं । 

” बहुत हंसी आ रही है ना तुम सबको , उस दिन भी बहुत हंसी आ रही थी जब ये नामर्द जुबान से मेरे बदन के कपड़े उतार रहा था , काम करके गई थी तुम लोगों के साथ मैं सात महीने , भले ही हमारी आपस में बनती ना हो मगर थी तो तुम्हारे जैसे ही मैं एक लड़की , तुम में कुछ तो मेरी अच्छी दोस्त भी हुआ करती थीं जो मेरे बारे में सब कुछ जानती थीं , मगर बोला कोई भी नहीं कोई उस दिन । “पूरे दफ्तर में सन्नाटा छा गया था जैसे किसी के मुंह में जबान ही ना हो ।शोर सुन कर मैं भी अपने ऑफिस से नीचे आ गया था ।

 ” यहां कितने हैं जो मेरे आगे पीछे घूमते थे , सबने कहा होगा की मैं तो उसके साथ भी घूमी फिरी थी । यहां तो प्रसाद लेते समय गलती से हथेली छू भी जाए इन मर्दों की दूसरी हथेली सीधे अपनी टांगों के बीच में पहुंच जाती है । आज मेरे बारे में बोला कल जब तुम यहां से चली जाओगी तुम्हारे बारे में भी यही बातें होंगी । कोई तुमने काम कितना किया इस बात की चर्चा नहीं करेगा , लोग करेंगे चर्चा तुम बॉस के ऑफिस में कब कब कितने समय थीं , काम करते समय किसके साथ तुम्हारे कंधे रगड़ रहे थे , अगर गलती से कभी किसी के साथ तुमने अपना कोई दर्द बांट लिया होगा तो वो तो महफ़िल में भुने हुए गोस्त की तरह परसा जाएगा । ” 

” सनाया ” मैंने सनाया को आवाज़ लगा कर रोकने की कोशिश करी ।

” नहीं सर इस बार नहीं , हर बार मैं लिहाज कर गई , मगर नहीं अब मुझे समझ आ गया है की कोई कृष्ण अब द्रोपदी की लाज बचाने नहीं आते , वो हमारे अंदर का कृष्ण है हमारा स्वाभिमान है जिसे हमे खुद जगाना होगा ।”

राज धीरे धीरे लोगों के पीछे अपने को छिपाने की कोशिश कर रहा था।” छिपने से कुछ नहीं होगा । लोगों से भाग लेगा खुद से कब तक भागेगा , आज से जब भी शीशे में खुद को देखेगा तेरी आंखों में खुद के लिए एक सवाल होगा , मुझे किसी से किसी जवाब की जरूरत नहीं , किस समझदार आदमी ने सड़क पर भौंकते कुत्ते से पूछा है कि तू मेरे पर भौंक क्यूं रहा है ।” टेबल पर रखी बिसलेरी की बॉटल खोल कर सनाया ने होटों से लगा ली ।

” सनाया कूल डाउन डियर , आओ ऑफिस में आराम से बैठ कर बात करते हैं ।” मेंने सनाया के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा ।

” नहीं सर , नहीं , लोगों को फिर बात करने का मौका मिलेगा , मैं नहीं चाहती उस रिश्ते पर कोई दाग आए जो आपका मुझे कृष्ण जी का वो लॉकेट देते हुए बना था । बहुत संभाला उस लॉकेट ने मुझे , वक़्त आ गया है इसे वापस करने का , शायद किसी और द्रौपदी को भी सहारा मिल जाए । ”  अपने गले से लॉकेट उतारते हुए सनाया ने कहा ।

” सनाया …………. ।” लॉकेट लेते समय मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कैसे रिएक्ट करूं । आस पास खड़े स्टाफ की आंखों में मुझे जाने कितने सवाल दिख रहे थे । बस जिंदगी में यही एक चीज़ है जिससे मुझे बहुत घबराहट होती है , अपनी सफाई देना । 

” बैठ जाइए सर ” सनाया ने कुर्सी खींचते हुए कहा । वो खुद भी कुर्सी खींच कर बैठ गई ।स्टाफ के लोग इधर उधर होने लगे थे , राज का भी कुछ पता नहीं था ।

” सर सच कहा था आपने , जब तक हम खुद नहीं चाहें कोई हमारा फ़ायदा नहीं उठा सकता । झूठ बोला था मैंने उस दिन जब आप मुझे देखने हॉस्पिटल आए थे की मेरा ऐक्सिडेंट हुआ है । ” सनाया का चेहरा लाल हो रहा था ।” मुझे पता है सनाया ।” पानी की बोतल सनाया की तरफ बढ़ाते हुए मैंने कहा ।” कैसे सर , आपको कैसे पता लगा , मैंने  तो किसी को कुछ भी नहीं बताया । ” ” ठीक उसी तरह जिस तरह उस दिन  मुझे पता लग गया था कि तुम डॉक्टर का बहाना बना कर कहीं और जा रही हो ।”” उस दिन …………” बोलते बोलते सनाया कहीं खो सी गई थी ।__________________________________________________

” सर , प्लीज एक बार ………… , सिर्फ एक बार जाने दीजिए । ” सनाया की आंखें लाल थीं । “…………..”

 ” सर पक्का इस बार सिर उठा कर वापस आऊंगी , हर बार की तरह टूट कर नहीं । ” सनाया ने हाथ जोड़ते हुए कहा ।सनाया की आंखों में कुछ ऐसा था जो पत्थर की तरह लग रहा था ।

” सनाया, अपने आप को किसी को सौंप देना गलत नहीं होता है , गलत होता है किसी उम्मीद में अपने आप को किसी को सौंपना ।क्यूंकि जब उम्मीद टूटती है बहुत तकलीफ़ होती है । “

 आंखों के चमकते पत्थर पर पानी की एक बूंद फिसल आयी थी ।” अबकी बार कोई उम्मीद के कर नहीं जा रही हूं सर , और ना ही अगले को एक कदम और  बढ़ाने का मौका  देने । मेरे आंखों की पट्टी हट चुकी है सामने वाले को ये बताना है ।” 

” सर दुआ कीजिए की मेरी हिम्मत उसके सामने जा कर टूटे नहीं ।” सनाया उस समय एक छोटी बच्ची की तरह लग रही थी जो परीक्षा तो देने जा रही थी मगर बगैर तैयारी के ।

” सनाया , इसे अपनी मुट्ठी में रखना , मेरी मां का दिया हुए लॉकेट है जिंदगी में कई बार इसने मुझे संभाला है ।” मैंने अपने गले की चैन से कृष्ण जी का लॉकेट निकाल कर उसकी हथेली पर रखते हुए कहा ।

” सर ” सनाया ने हिचकिचाते हुए कहा ।

” कोई नहीं , अपनी जंग जीत कर मुझे वापस कर देना । ” मैंने सनाया के गाल थपथपाते हुए कहा ।

” अगर मेरा भाई होता तो बिल्कुल ………” 

” ना , फिर वही गलती , जो नहीं है उसकी उम्मीद में कोई और रिश्ता बनाना सोच कर देखो ठीक है क्या । ” लंच टाइम  होने वाला था , लोग अपनी अपनी सीट से उठने शुरु हो गए थे ।

” चलो जाओ आल दा बेस्ट । जाना कहां है , टाइम से आ जाएगी ना ।”

 ” सर कहीं नहीं , ऑफिस के पीछे वाली गली में  गाड़ी पार्क करके वेट कर रहा है । आती हूं जल्दी । ” बोलते बोलते हवा के झोंके की तरह सनाया बाहर निकल गई ।

अजीब थी ये लड़की , दो महीने हुए थे ऑफिस ज्वाइन करे , पूरा का पूरा ऑफिस हिला कर रख दिया था इस लड़की ने । ऑफिस का कोई मेल स्टाफ ऐसा नहीं था जो इसके आगे पीछे ना घूम रहा हो , बेइंतहा बिंदास और बेबाक लड़की थी , ऑफिस की किसी फीमेल स्टाफ को ये फूटी आंख नहीं भाती थी सिम्पल सी बात थी उन्हें अटेंशन मिलनी जो बंद हो गई थी ।शाम को किसी भी लड़के से अपने पीजी तक की लिफ्ट के लेती । कैंटीन में लड़कों के साथ बैठ कर खाना खाना , मजाक करना , उसके रोज के काम थे । लड़कियों के साथ वो बहुत ज्यादा देर तक बैठ नहीं पाती क्यूंकि शायद वो और उसकी बातें आम लड़कियों से बहुत अलग थीं ।मगर मजाल है कोई अपनी बाउंड्रीज क्रॉस कर सकता । उस दिन तो पार्किंग में एक लड़के के गाल पर उसकी पांचों उंगलियां छप गई थीं , बात सिर्फ इतनी सी थी कि मजाक मजाक में उस लड़के ने उसकी कमर में हाथ डाल दिया था।
” मगर सनाया तुम उस दिन वापस ही नहीं आईं । और अगले दिन ……”

” अगले दिन आप लोगों को मेरे ऐक्सिडेंट की खबर मिली ………की सनाया को कुछ लड़कों ने यूज करके हाईवे पर फेंक दिया ।”  सनाया ने मेरी बात को पूरा करते हुए कहा ।

” अरे इतनी दूर से क्या सुनाई पड़ रहा होगा , आ जाओ बताती हूं उन लड़कों ने मेरे साथ क्या क्या मज़े किए । वहां से सुनने की कोशिश क्या कर रहे हो । ” सनाया ने उन तीन चार लोगो को आवाज़ लगाते हुए कहा जो पास की वर्किंग टेबल पर खड़े हमारी बातें सुनने की कोशिश कर रहे थे ।

” सनाया , कंट्रोल । ” मैंने सनाया के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा ।

” चलो ऑफिस में बैठ कर बात करते हैं । मुझे तुमसे बहुत सारी बातें करनी है ।

” मैंने उठते हुए कहा ।” राहुल , प्लीज दो कॉफी भेजना हमारे ऑफिस में । ” मैंने पैंट्री वाले लड़के को आवाज़ लगाते हुए कहा ।

” तसल्ली से बैठो और बताओ क्या हुआ था , कब आई वापस घर से , कहां रह रही है अब , कहीं जॉब ली की नहीं ।” मैंने अपनी कुर्सी पर बैठते हुए कहा ।

” अरे बाप रे इतने सवाल , एक साथ ” सनाया ने बैठते हुए कहा ।

” तुमने काम ही ऐसे किए थे , जान निकाल कर रख दी थी सबकी ।ऐक्सिडेंट तो नहीं था वो , इतना तो मुझे कन्फर्म है ।”

” ………………..” सनाया ने बिना कोई जवाब दिए अपना सिर झुका दिया ।

” सनाया ” मुझे समझ आ रहा था सनाया के भीतर बहुत कुछ चल रहा था ।

” वैसे अगर ना भी बताना चाहती हो तो ठीक है । ” वैसे भी सनाया जब तक ऑफिस में थी बॉस और एम्पलाई के तौर पर हमारी कभी नहीं बनी । 

” नहीं ,नहीं सर ऐसा कुछ नहीं है , उस दिन जब आप मुझे देखने हॉस्पिटल आए थे और लोग भी आपके साथ थे , इसीलिए ……..”

” इसीलिए तुमने मुझसे पूछा था , सर मेरा चेहरा खराब हो गया अब तो मेरी शादी नहीं होगी , दोनों पैरों में मल्टी फ्रैक्चर , कूल्हे की सरकी हड्डी , दोनों हाथों में लगे प्लास्टर की तुम्हे कोई परवाह नहीं थी । ” सनाया की आंखों के पत्थर बिल्कुल खामोश थे , एक टाइम था ये पत्थर पानी में डूबे रहते थे ।

” क्या बताती, क्यूं हुए ये सब , मजाक बनवाती अपना । नहीं सर आपके साथ स्टाफ के जो लोग थे , उन्हें वैसे भी लगता था की मुझे अपनी खूसूरती पर बहुत गुरूर है , और वो जो लड़कियां  आई थीं ना आपके सामने वो मेरा हाल पूछने नहीं देखने आई थीं । “

” …………….”

” और बगल में मेरी मां लेटी थीं , जिन्हें मेरे  बचपन से ही ये तसल्ली थी कि मेरी खूबसूरती के कारण मेरी शादी किसी अच्छे घर में हो जाएगी , और इसी बहाने मेरी बाकी तीनों बहनों की जिंदगी भी सुधार जाएंगी । क्या बताती उस सब के सामने की इसी खूबसूरती की सजा मिली है मुझे । ” सनाया बोल रही थी मगर उसकी आंखें बिल्कुल खामोश थीं ।

” उस दिन जब मैं आपको बोल कर गई थी , बगल वाली गली में वो हर बार की तरह अपनी गाड़ी में मेरा इंतज़ार कर रहा था । मैं दरवाज़ा खोल के उसके बगल में बैठ गई , उसकी आंखों में देखते ही एक सेकंड को मुझे लगा कि मैं सब भूल गई हूं की मैं यहां किसलिए आई हूं , लगा की मैं उसकी फैली हुई बाहों में समा जाऊं । तभी शायद मुट्ठी में बंद किया हुआ कृष्ण जी का लॉकेट मुझे चुभा ।” सनाया बोलते बोलते शायद उस दिन की बातों में खो गई थी ।
….……………………………………………” नहीं वैभव , प्लीज नो ।” अपने को वैभव से दूर करते हुए सनाया ने कहा ।” क्या हुआ जान , नाराज़ हो क्या , लेट्स गो फॉर ए कॉफी ।” हर बार की तरह वैभव ने गाड़ी स्टार्ट करते हुए कहा ।

” नो वैभव , नो , आई हैव टू बी बैक इन ऑफिस इन २० मिनट्स ।” ईग्निशन से चाभी निकालते हुए सनाया ने कहा ।

” यार तुम इतनी टेंशन क्यूं लेती हो ऑफिस की , मैं हूं ना , आई विल टेक केयर ऑफ एवरीथिंग ।” वैभव ने सनाया का हाथ पकड़ते हुए कहा ।

” और ऐसा तुम क्यूं करोगे , क्यूंकि मैं तुम्हारे साथ सो रही हूं , शादी तो तुम करोगे नहीं मुझसे , फिर रखैल बना कर मेंटेन करना चाहते हो ।” सनाया का चेहरा तमतमा गया था ।

” बोला तो सही टाइम देख कर dad से बात करूंगा । “

” और पिछले ५ सालों में तो ये टाइम आया नहीं । क्या गारंटी है की ये टाइम आएगा भी । बहुत हो गया प्यार के नाम पर , आंखें खुल गई हैं मेरी , और नहीं बहुत हो गया है । स्टॉप फॉलोइंग , एंड ऑन एन होनेस्ट नोट आई एम् नोट इंटरेस्टेड इन गेटिंग रेइंबर्सेड फॉर स्लीपिंग विथ यू” सनाया ने कर का गेट खोलते हुए कहा ।

” तुम्हे अचानक क्या हो गया है , ये इलेक्शन खत्म हो जाएं फिर बात करूंगा dad से , प्रोमिस ।”

” क्यूं ऐसा क्या है जो इलेक्शन के बाद ………..”

” सनाया , व्हाई आर यू बेहविंग लाइक ए बिच ।” ” ओ यस , अगर मैं तुम्हारी बात ना मानूं तो मैं बिच हूं , ग्रेट , और अगर तुम्हारी बात मान लेती हूं तो आई फील लाइक ए होर , आई थिंक आई प्रेफर बीइंग ए बिच ।” 

” गो टू हैल ।” वैभव ने जोर से दरवाज़ा बंद करते हुए कहा ।

” और गेटिंग आउट ऑफ हेल । डिपेंड्स हाउ  यू फील ।”  शनाया ने एक उंगली दिखाते हुए कहा।

” गेट लोस्ट यू बिच ” वैभव ने गाड़ी स्टार्ट करते हुए कहा ।

” कम से कम मेरे को अपनी जात तो पता है तेरे को तो वो भी नहीं पता है । ” शनाया ने अपनी चाल तेज करते हुए कहा ।…………………………………………………………….

” मुझे लगा था सर मैंने सब कुछ खत्म कर दिया है , सब कुछ धीरे धीरे पहले जैसा हो जाएगा । लेकिन ये मेरी बहुत बड़ी गलतफहमी थी ।” सनाया ने चेहरा उठा कर मेरी आंखों में देखते हुए कहा।

” सनाया . मगर इसके बाद ऐसा क्या हुआ …………….” मैंने अपनी बात को अधूरा ही छोड़ दिया । जरूरी तो नहीं सामने वाला हर सवाल का जवाब देना चाहे ।

” सर अभी भी शायद कोई डोर बाकी थी जिसका टूटना बाकी था । वो जो आंसू उस दिन ऑफिस वापस आ कर मैंने बहाए थे उनको रोकना भी बाकी था ।  सर उस दिन मेरे लौट के आने के बाद पूरे टाइम ऑफिस में यही बात होती रही की मैं कोई ना कोई कांड करके आई हूं । वैसे भी उन दिनों मैं ही तो हॉट टॉपिक ऑफ डिस्कशन थी । ” 

” तुम घूमती भी तो सबके साथ थीं खुले आम । ” बोलने के बाद मुझे लगा कि मैं कुछ ग़लत है बोल गया था ।

” सॉरी ” मुझे समझ नहीं आ रहा था कैसे ……

” कोई नहीं सर , मुझे लगता था सब साथ में काम करने वाले दोस्त हैं । हंसी मजाक तो चलता ही रहता है । कभी कोई मुझे घर छोड़ने को बोलता या सुबह पिक करने को कहता तो मैं कभी मना नहीं करती थी। अकेली रह रही थी , एक साथ हो जाता था और कुछ पैसे भी बच जाते थे । ” सनाया ने चाय का घूंट भरते हुए कहा ।

” ह्न्नन्न …” सनाया के कप में शायद कोई बूंद गिरी थी ।

 ” सर मैं कोई सफाई नहीं दे रही हूं , और आपको सफाई देने की शायद जरूरत भी नहीं थी , मुझे याद है आपका और मेरा कितना झगड़ा होता था , मैं आपसे कितनी डांट खाती थी आप मुझे हमेशा यही कहते थे की आपको मेरी पर्सनल लाइफ से कोई प्राब्लम नहीं थी आपको प्रॉब्लम थी काम को के कर मेरे एट्टीट्यूड से ।”

“………………”

” अब समझ आता है की मुझे तो सिर्फ वही दिखता था जो मेरे सामने होता था या फ़िर किया जाता था , आप वो सब देखते और समझते थे जो मेरे पीछे हो रहा था । ” सनाया चाय में पड़ी हुई मलाई को धीरे धीरे हटा रही थी । 

” फॉरगेट इट शनाया …….” मुझे समझ ही नहीं आ रहा था की मैं कैसे रिएक्ट करूं ।

” कोई नहीं सर , मैं सब भूल चुकी हूं लेकिन शायद यहां के लोग नहीं भूले खास कर कुछ लोग इसी लिए मुझे आना पड़ा क्योंकि मुझे समझ आ चुका था की  बाहर से कोई  कृष्ण नहीं आने वाला , कृष्ण भी मेरे भीतर है और चीर भी । सिर्फ अपने बाल ना बांधने से कोई मेरे लिए महाभारत नहीं लड़ेगा , मुझे अपनी महाभारत खुद ही लड़नी होगी ।”

” सनाया ” कितनी बड़ी और समझदार हो गई थी ये लड़की ।

” ये देखिए सर ……” बोलते बोलते उसने अपनी कमीज़ की बाजू उठाई और अपनी कलाई मेरे आगे कर दी ।वैभव शनाया के नाम का टैटू उसकी कलाई पर चमक रहा था जिसके चारों तरफ लाल रंग के छोटे छोटे हार्ट बने थे ।

” मतलब अब सब ………..”

” नहीं सर वैसा कुछ नहीं है , वैभव इस आउट ऑफ माई लाइफ , ही वास ए  मिस्टेक , थिस रिलेशनशिप वास ए मिस्टेक । ये टैटू बहुत पुराना है ……..। ”  सनाया ने  शर्ट के बाजू को नीचे कर के कफ के बटन लगाते हुए कहा ।

“……” मेरे आंखों के सवाल को शायद सनाया ने पढ़ लिया था ।

” सबने मुझसे कहा की इस टैटू को हटाने को , कॉज इट वास ए मिस्टेक । मगर मैंने ऐसा नहीं किया , मैं अपनी गलतियों से भागना नहीं चाहती थी , आई वांटेड तो ओन इट , मेरी जिंदगी, मेरी गलतियां भागना या नजर चुराना कोई सॉल्यूशन तो नहीं था ।”

” और फिर इस टैटू के ऊपर कोई और टैटू बनवा लेती तो क्या उससे जिंदगी का ये हिस्सा खत्म हो जाता या मैं उसे भूल जाती । किसी दाग को दूसरे दाग से छुपाना , मेरे बात पल्ले नहीं पड़ी । और फिर क्यूं कोई नया रिश्ता पुराने को छिपा कर तो नहीं बनाया जा सकता । ” सनाया में चाय का कप साइड करते हुए कहा ।

कुछ था इस लड़की की बातों में जो मुझे अन्दर तक छील रहा था । कितना बदल गई है ये लड़की इतने से दिनों में ।

” बदलना ही पड़ता है सर , अगर अपनी गलतियों से ना सीखा तो क्या फायदा ” सनाया ने जैसे मेरे मन की बात सुन ली थी ।

” उस दिन पता है क्या हुआ सर ……….ऑफिस पहुंचने के बाद वैभव ने मेरे फोन पर बार बार मेसेज भेजने शुरू कर दिए । नॉन स्टॉप कॉल कर रहा था वो मगर मैंने फोन को वाइब्रेटर पर कर दिया था । ऑफिस में सब आ कर मुझसे जानने की कोशिश कर रहे थे की क्या हुआ है , शायद उनकी भी कोई गलती नहीं थी हर कोई अपनी जिंदगी की  रूखी रोटी पर दूसरे की जिंदगी के अचार का मसाला लगाना चाहता है । मैं भी शायद यही करती थी , हम सब जाने अनजाने ये करते हैं ।  गलती सिर्फ इतनी होती है की इन सब में हम दूसरे के बारे में ओपिनियन बना लेते हैं ।

“कितनी सीधी और साफ बात कर रही थी ये लड़की , मैंने बाहर खड़े विक्रम को बाद में आने का इशारा किया ।

” पता नहीं क्यूं मगर मैंने वैभव का फोन उठा ही लिया ।” सनाया वापस उस दिन में उतरने लगी थी ।…………………………………………….
” जान प्लीज , माफ करदो मुझे , प्लीज गलती हो गई थी मुझसे , गुस्से में पता नहीं क्या क्या बोल गया था मैं । ” वैभव फोन पर गिड़गिड़ा रहा था ।

” कोई नहीं , कम से कम वो तो बोला जो तुम्हारे दिल में था । “

 ” नहीं जान तुम ऐसा सोच भी कैसे सकती हो , वो तो बस उस दिन घर पर पापा से किसी बात पर झगड़ा हो गया था और गुस्सा तुम्हारे ऊपर निकाल दिया । मुझे सच में ऐसा नहीं करना चाहिए था ।” 

” इट्स ओके , वही हुआ जो होना चाहिए था । कब तब एक नकली उम्मीद में हम दोनों इस रिश्ते को खींचते रहते । ” सनाया से एक गलत एंट्री पर व्हाइटनर लगाते हुए कहा ।

” प्लीज सनाया तुम्हे क्या सच में लगता है की मैं तुमसे शादी नहीं करना चाहता हूं । तुम तो डैडी के गुस्से को जानती हो ना । ही विल किल मी ” वैभव जैसे गिड़गिड़ा रहा था ।

” इट्स ओके ,वैभव मैं तुमसे कोई नाराज़ नहीं हूं । और फिर मैं भी इस रिश्ते में उतना ही शामिल थी जितने तुम । ” शनाया को समझ आ रहाथा बात क्या रुख लेने वाली थी । 

” आई रिएली लव यू शनाया , प्लीज प्लीज मुझे माफ़ कर दो । मैं जल्द से जल्द डैडी से बात करूंगा । आई कांट एफोर्ड लूसिंग यूं । शनाया , आई वांट टू मीट यू पर्सनली । प्लीज । आज शाम को , एक बार । “

 ” नो वैभव आई कांट गो आउट , फ्लैट पर कोई नहीं है मुझे टाइम से पहुंचना होगा । “

 ” कोई नहीं मैं आ जाता हूं शाम को , सिर्फ मिलना चाहता हूं थोड़ी देर के लिए ।”

” फिर कभी वैभव , गिव में समटाइम ।” सनाया ने मना करते हुए कहा।

” प्लीज शनाया , प्लीज । “

 ” ओके शाम ८ बजे ……… ” चाह कर भी शनाया मना नहीं कर पाई ।बातों बातों में शनाया ने फिर एक एंट्री गलत कर दी थी । फोन रख कर उसने व्हाइटनर उठा लिया ।…………  … …….…………….
” हम जितना किसी रिश्ते से भागने की कोशिश करते है उतना ही हम उस रिश्ते में उलझते जाते हैं । और यही मेरे साथ हो रहा था , मैं जितना ज्यादा उस रिश्तों को तोड़ने के तरीके ढूंढ़ रही थी उतना ज्यादा इंतज़ार शाम का बढ़ रहा था । आंसू कब धीरे धीरे मुस्कुराने लगे थे , उम्मीद ने अपनी चादर फिर फैलानी शुरू कर दी थी । “

” और इसी लिए तुम उस दिन जल्दी चली गई थीं । ” मैं इस लड़की को जितना समझने की कोशिश कर रहा था उतना ज्यादा उलझ रहा था ।”

सच में कई बार वक़्त आपको एकदम से इतना सीखा देता है जो आप सीखने से घबरा रहे होते हो , या फ़िर सच का सामना करने से भाग रहे होते हो । ” उस दिन शाम को भी मैं जितना खुद को बिज़ी करने की कोशिश कर रही थी , आंखें उतना ही घड़ी की सूइयां पर टिकी हुई थीं , और फिर ८ बजे डोर बेल बजी ” 

पता नहीं क्यूं मेरी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी , शायद आदत बन गई है हमारी दूसरों की जिंदगी में झांकने और अपनी को ढांपने की और मैं औरों से अलग कहां था , फर्क सिर्फ इतना था की मैं ये जानना चाह रहा था की मैंने जो सोचा था वो सही था या गलत ।

” क्या सोचने लगे आप , जैसा आपने या और लोगों ने सोचा वैसा कुछ भी नहीं हुआ था , ना तो मैंने सुसाइड करने की कोशिश करी थी और ना मैं प्रेगनेंट थी और मैंने जरूरत भी नहीं समझी किसी को सच बताने की , जरूरत भी क्या थी , मेरी जिंदगी मेरा तरीका । बस आपका एक कर्ज था मुझ पर ………..” 

” मेरा ?”

 ” हां ,उस पहले कदम को लेने की हिम्मत देने के लिए जिसने मेरी जिंदगी बदल देनी थी ।”

 ” शनाया “

 ” सर, क्या एक कप चाय और मिलेगी । ” सनाया ने झिझकते हुए कहा।

” हां , हां क्यूं नहीं शनाया ।” मैंने इंटरकॉम उठा कर कैंटीन का बटन दबाते हुए कहा ।

” डोर बेल बजते ही दिल और दिमाग ने जैसे एक दूसरे का हाथ छोड़ दिया । भागते हुए सीढ़ियां उतरी और मेन गेट का लौक खोल दिया वैभव बाहर अपने दोनों जिगरी दोस्तों के साथ खड़ा था , इतने समय में मेरी इनसे अच्छी दोस्ती हो गई थी । मैंने जल्दी से तीनों को अंदर करते हुए मेन गेट लौक कर दिया । इधर उधर देखा तो पास के दोनों घर बंद हमेशा की तरह बंद थे , सामने और बगल के प्लॉटों से मजदूर काम करके जा चुके थे , नया एरिया होने के कारण स्ट्रीट लाइट अभी लगी नहीं थी । गेट वापस लौक करके हम टैरेस पर बने मेरे वन रूम पीजी तक आ गए । “

 ” क्या यार आज तो पूरे  घर में कोई  है ही  नहीं ” निशांत ने रेलिंग पर टेक लगाते हुए कहा ।

” हां अंकल आंटी तीन दिनों को अपने बेटे के पास कोटा गए हैं , नताशा की छुट्टी है दो दिन की, वो मम्मी पापा को मिलने चली गई और सिमरन और रूही की नाइट शिफ्ट है हॉस्पिटल में । ” मैंने रूम से चेयर्स बाहर निकालते हुए कहा ।

” जान देखो मैं तुम्हारे लिए क्या लाया हूं ,” वैभव ने अपने बैग से  रेड वाइन की बॉटल और ब्लेंडर की बॉटल निकाल कर मुंडेर पर रखते हुए कहा । 

” वैभव , ये सब ………..” 

” प्लीज जान , मैं दिल से माफी मांगता चाहता हूं आज सुबह के लिए । मैंने बहुत कुछ गलत बोल दिया था सुबह । ” वैभव ने मुझे अपनी बाहों में समेटते हुए कहा ।

” इट्स ओके , बेबी , मैं भी कुछ ज्यादा ही बोल गई थी । पता नहीं बहुत इनसिक्योर हो गई थी इस रिलेशन को लेके ।” मैं धीरे धीरे फिर बिखरना शुरू हो गई थी । 

” आई प्रोमिस, हम जल्दी ही शादी कर लेंगे । डैडी माने या ना माने , कोई फर्क नहीं पड़ता है । ” वैभव ने बैग से चखने के पैकेट निकाल कर रखते हुए कहा ।

” बेबी ” मेरी आंखें शायद बेहने वाली थीं ।

” क्या यार शनाया , मैं हमेशा सोचता था की तुम इंडिपेंडेंट लड़की हो , कहां इस शादी वादी के चक्कर में पड़ रही हो । ” निशांत ने ब्लेंडर की बोतल  खोलते हुए कहा ।

“क्यूं इंडिपेंडेंट लड़कियां शादी नहीं करती हैं क्या  । ” वैभव को सारी बातें सबके साथ क्यूं शेयर करनी होती हैं मैं मन ही मन में गुस्सा रही थी ।

” निशांत , क्यूं परेशान कर रहा है अपनी भाभी को । ” मेरी आंखों से प्यार की एक हवा का झोंका उड़ कर वैभव को छूने लगा ।

” चल यार , हम अन्दर चल कर बैठते हैं । ” वैभव ने मेरा हाथ पकड़ कर कहा ।

” और तुम लोगों को कुछ खाना पीना हो तो स्विगी से ऑर्डर कर लेना।” अपना कार्ड निशांत और टीनू  तरफ उछालते हुए वैभव ने मेरा हाथ पकड़ते हुए कमरे का दरवाज़ा का खोला ।

कमरे का दरवाज़ा बंद करते ही वैभव ने मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया । मैंने उसे खुद से दूर करने की कोशिश की मगर शायद ये कोशिश अपने आप में अधूरी थी । “

” लेट्स गेट मैरिड जान , मैं तुम्हे खो नहीं सकता हूं , आई कांट एफोर्ड इट , वैभव के हाथ मेरे बदन पर मचल रहे थे , मैं चाह कर भी उसे रोक नहीं पा रही थी । ” शनाया कुछ असहज हो रही थी ।

“कोई नहीं शनाया , दिल और दिमाग की जंग में ऐसा होता है । ” मैंने शनाया की हथेली पर हाथ रखते हुए कहा ।

ऑफिस का दरवाज़ा खोलते हुए निर्मल चाय की ट्रे के कर अन्दर आ गया । शनाया की हथेली मेरी हथेली में देख कर उसके चेहरे पर एक मुस्कुराहट आ गई । कई बार ये मुस्कुराहट किसी की सोच में क्या चल रहा है सब बयान कर देती है । शनाया ने उसकी तरफ देख कर धीरे से अपनी हथेली खींच ली ।

” जाते समय दरवाज़ा बंद कर देना ” मैंने निर्मल की तरफ एक आदेश उछालते हुए कहा ।

” जी पता है मुझे ।” निर्मल ने जैसे वापस एक पत्थर उछाला । वो खुद कैंटीन में वापस जा कर राज और बाकी स्टाफ के साथ एक नई कहानी शुरू करने को तैयार था ।

” निर्मल ………” मेरी आवाज़ में अजीब सी सख्ती थी ।

” छोड़िए सर , किस किस को रोकेंगे आप ” सनाया ने मेरी बात काटते हुए कहा ।

“हनन्न ” मैंने चाय का एक कप उठाते हुए कहा ।

” जंग उस दिन दिल और दिमाग की नहीं , दिमाग और शरीर की थी और शरीर उसमे जीत गया , वाइन मुझे अच्छी तरह चढ़ चुकी थी ।”

 ” रात के डेढ़  बजे हम कमरे से बाहर निकले , बाहर निशांत और टीनू अभी भी अपना पेग बना रहे थे । ” 

” क्या यार बहुत देर लगा दी ” निशांत ने अपना ग्लास वैभव की तरफ बढ़ाते हुए कहा ।

” अब इतना टाइम तो लगना था , आखिर कार  जान को मनाना था ।” वैभव की आवाज में कुछ ऐसा था जो मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा ।

” फिर मना लिया जान को और मना ली सुहागरात । ” टीनू ने सिगरेट का धुंआ छोड़ते हुए कहा ।

” और नहीं तो क्या , तुम लोगों ने भी मनानी है तो शादी का वादा करो और मना लो , कुतियों को रोटी डालना ही काफी होता है ।” वैभव ने मुझे अपने से दूर धक्का देते हुए कहा ।

‘ मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था ये हो क्या रहा है । जुबान जैसे तालू से चिपक गई थी ।”

” क्यूं सुबह मुझे मेरी जात बता रही थी , अपनी जात पता चल गई । शादी करेगी मुझसे ,औकात देखी है अपनी ………..तेरी जैसी लड़कियां सिर्फ बिस्तर के लिए होती हैं घर के लिए नहीं । ” वैभव की आवाज़ चारों तरफ गूंज रही थी । 

“मैं फिर एक बार गलती कर चुकी थी, या फ़िर ये मेरी आदत बन चुकी थी क्यूंकि गलती तो सिर्फ एक या दो बार होती है उसके बाद तो वो आदत बन जाती है । और अचानक वैभव के गाल पर पड़े मेरे तमाचे की आवाज़ से तीनों की हंसी जैसे पत्थर हो गई । ” 

” वैभव तो जैसे पागल सा हो गया था , उसने मुझे गाली देते हुए धक्का दिया , मेरा पैर पीछे रखी कुर्सी से उलझा , इससे पहले की मैं अपने आप को संभालती मैं मुंडेर से टकरा कर पलटी और उसके बाद मुझे कुछ याद नहीं । ” 

” अस्पताल में जब आंख खुली तो पता चला की तीन लड़के मुझे छोड़ गए थे , मैं उन्हें सड़क पर गिरी मिली थी , शायद नशे में मैं छत से गिर गई थी । ” सनाया ने मुस्कुराते हुए कहा ।

” सनाया , मगर तुमने पुलिस को अपने बयान में कुछ क्यूं नहीं बताया। तुमने क्यूं कहा की तुमने नींद की दवा खाई हुई थी और चक्कर खा कर तुम गिर गई ।” मुझे समझ ही नहीं आ रहा था मैं कैसे रिएक्ट करूं।

” फ़ायदा , जो होना था हो चुका था । ” 

” मगर शनाया …………..” ” मैं समझ रही हूं सर , मैं उसपर केस कर सकती थी । एक और लड़की उसके चंगुल में आने से बच जाती । उससे बच जाती मगर बाकी मर्दों का क्या , ये तो उनकी फितरत में शामिल है , गलती मेरी ही थी जो मैंने शादी को ईज़ी वे समझ लिया जिंदगी में सेटल होने के लिए। अगर वैभव मुझसे शादी कर भी लेता तो क्या होता , को वो शादी के वादे करके चाहता था वो उसे लीगल कागज पर करने को मिल जाता । नहीं सर मुझे समझ आ गया था अपनी बहनों को सेटल करने के लिए मुझे शादी करने की या उनकी शादी कराने की कोई जरूरत नहीं है , उन दोनों का एडमिशन मैंने कॉलेज में करवा दिया है ।उनकी पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी मैंने ले ली है । एमबीए करेस्पॉन्डेंस ज्वाइन कर लिया है , जॉब के साथ साथ वूमेन ऑर्गनाइजेशन भी ज्वाइन कर ली है अपनी जैसी लड़कियों के लिए ।” सनाया बोलते बोलते हांफने लगी थी ।

” मगर तुम अपने हक के लिए कहां …………” मेरी आवाज़ लड़खड़ा रही थी ।

” हक , ये आदमी क्या देंगे हमें , मुझे समझ आ गया है दिल , दिमाग और शरीर को अलग अलग कैसे जीते हैं । आज अगर मै किसी के साथ सोती हूं तो वो मेरे शरीर की भूख है और खाना खा कर बर्तन को दो कर साफ कर दिया जाता है बर्तन कभी झूठा नहीं होता झूठी होती है हमारी सोच “

 ” मगर इस तरह सनाया ……………….”

 ” कोई नहीं सर जिस दिन दिल को अपनी थाली मिल गई , शादी भी कर लूंगी सिर्फ इतना ही ……………. समझ आ गया है जरूरत चीर की नहीं अपने शरीर को ले कर आने वाली शर्म की है । जब इनको शर्म नहीं आती तो हमे क्यूं …………” बोलते बोलते शनाया ने दरवाज़ा खोल दिया बाहर दरवाजे से सटा हुआ राज खड़ा था जो झटके से शनाया के पांव में आ गिरा ।

” कोई नहीं इसी बहाने मेरा हाथ पकड़ ले ।” सनाया ने उसे उठाने के लिए हाथ बढ़ाते हुए कहा ।

 दरवाज़ा बंद करते हुए सनाया पलटी ” छीनाल औरत नहीं होती सर आदमी होता है ।” 

झटके से  दरवाजे पर लगी सत्य मेव जयते की तस्वीर हिल रही थी ।
………….…………………………..

Hindi story by Nikhil Kapoor
Blog: Lamhe Zindagi Ke

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